मै कहा और मेरा मंज़िल कहा

मौत तो आना ही है कभी न कभी

उमर बढ़ती जा रही है

मंज़िल भी दूर जा रही है

लग रहा है अब मुझे मौत कही आस पास है

डर नहीं लग रहा है मुझे मौत से

डर लग रहा है बस अपनी मंज़िल से

बस अपनी मंज़िल से

मौत तो आना ही है कभी न कभी


This shayari was written when a person tries to get his target but unfortunately it gets delays and delays, its fear of target not death that bothers him.

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